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ॐ पातु नित्यं शिरसि पातु ह्रीं कण्ठदेशके ॥ १०॥ राजस्थाने दुर्गमे च पातु मां सर्वतो मुदा । तस्य भूतिं विलोक्यैव कुबेरोऽपि तिरस्कृतः । चण्डिकातन्त्रसर्वस्वं बटुकस्य विशेषतः ॥ ४॥ हे बटुक भैरव ! आपकी जय हो। हे शिव के अवतार आप सभी संकटों को दूर कर इस भक्त पर कृपा https://artybookmarks.com/story16507614/getting-my-bhairav-kavach-to-work

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